श्री खाटू श्याम का इतिहास
कलयुग के अवतारी, हारे के सहारे और शीश के दानी बाबा श्याम की अद्भुत और अलौकिक गाथा।
महापराक्रमी बर्बरीक का जन्म
बाबा खाटू श्याम जी का संबंध महाभारत काल से है। वे पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र 'बर्बरीक' हैं। बचपन से ही वे अत्यंत वीर और महान योद्धा थे। उन्होंने भगवान शिव और अग्निदेव की घोर तपस्या कर तीन अमोघ बाण प्राप्त किए थे, जिससे वे तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर सकते थे।
माता को दिया वचन - हारे का सहारा
जब महाभारत का युद्ध तय हुआ, तो बर्बरीक ने भी युद्ध में भाग लेने की इच्छा जताई। अपनी माता 'मौर्वी' से आशीर्वाद लेते समय, माता ने उनसे वचन लिया कि वे युद्ध में उसी पक्ष का साथ देंगे जो हार रहा होगा। इसी महान वचन के कारण आज उन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है।
शीश का परम दान
भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक कौरवों की ओर से लड़े तो पांडवों की हार निश्चित है। अतः उन्होंने ब्राह्मण का भेष धरकर बर्बरीक से दान में उनका शीश मांग लिया। वीर बर्बरीक ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए बिना संकोच अपना शीश काटकर प्रभु के चरणों में अर्पित कर दिया।
कलयुग के श्याम
बर्बरीक के इस अद्वितीय बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' के नाम से पूजे जाएंगे। आज राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम में उनका भव्य मंदिर है, जहाँ लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
Divine History
बर्बरीक की अमर गाथा
Divine Titles
बाबा श्याम के पावन नाम
Visit Us
पधारें श्री खाटू श्याम मंदिर
श्री खाटू श्याम मंदिर
Kosmi, Betul, Madhya Pradesh
दर्शन: 5:30 AM – 12:30 PM | 4:00 PM – 9:45 PM